डब्लूडब्लूसी की राष्ट्रीय महिला काव्य सम्मेलन का भव्य आयोजन कल 09 अगस्त 20 को सम्पन्न हुआ ।

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कोरोना के इस विकट काल में महिलाओं में सृजनात्मता को बढ़ावा देने हेतु डब्लूडब्लूसी (वर्ल्डस विमेन फ़ार चेंज) की पहली राष्ट्रीय महिला काव्य सम्मेलन का आयोजन डब्लूडब्लूसी की राँची चैप्टर के द्वारा गुगल मीट पर किया गया। इसमें प्रायोजक डब्लूडब्लूपी (वर्ल्डस विमेन पार्लियामेंट)था। यह देश भर की प्रतिभाशाली महिलाओं, जिसमें देश भर की दिग्गज कवयित्रियाँ, प्रोफ़ेसर, लेखिका, विभिन्न विद्यालयों, कॉलेजों की महिलाये उपस्थित रही, के लिए बेहद सुखद, सृजनातमक, उपयोगी मंच साबित हुआ।

इसके मुख्य अतिथि फ़िल्म निदेशक दिनेश साहदेव जी थे। जिन्होंने इसे दूरगामी परिणाम वाली महिला संस्था कहा। इस सम्मेलन की मुख्य संचालिका डब्लूडब्लूसी की राँची जिला अध्यक्ष करुणा सिंह जी थीं। जिसमें सहयोग कवयित्री पुष्पा सहाय, कवि डा. सुरेश शौर्य द्वारा संयुक्त रुप् से दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत करुणा सिंह ‘कल्पना’ के सरस्वती वन्दना से हुई। उसके बाद
डा. विजय लक्ष्मी, काठगोदाम (मैं नारी हूँ आज की), तमन्ना चाहत मौर्य (हे त्रिकाल, हे त्रिलोचन दे दे वचन), पूजा सैनी, दिल्ली (हमारे देश के फ़ौज़ी),नेहा जैन,ललितपुर (पल-पल तेरी चाहत में) स्वाति जैसलमेरिआ, राजस्थान की कजरी प्रस्तुति(पिया जी आओ नी), डा. बीना सिंह (कजरी), पायल पांडेय, मुम्बई(कब बद्लेगी पुरुष की विचारधारा), पुष्पा सहाय(तुम्हें चलना ही होगा), अर्चना फौजदार(आजादी का दिन आया), पर्णिका श्रीवास्तव, लखनउ (लोक नृत्य) ने सबका मन मोह लिया. सुधा सिन्हा, मीना जैन(भोपाल), प्रो. मीना श्रीवास्तव (ग्वालियर), प्रतिभा स्मृति, तन्दुला राज आनंद (बिहार), पूजा सचिण(गोआ), उत्तर प्रदेश से मंजु फौजदार (अलीगढ़), सावित्री मिश्रा, क्रान्ति श्रीवास्तव(बोकारो), अंजनी शर्मा(गुरुग्राम), शोभा रानी तिवारि, अलका जैन (इन्दोर), व्याख्याता कल्पना गुप्ता,जम्मु (बिखरा हुआ इंसान मैं), अलका पांडे(मुम्बई), विधी तिवारी, कलावती कर्वा, आशा मेहरा, शीतल बुतेश्वर(छत्तीसगढ़), रेनु बाला धर(झारखंड), डा. सुनिता मंडल(कोलकता), रजनी शर्मा, विभा राय नवीन, ललिता बर्मा, उषा साहु, गीता राजेन्द्र मिश्रा (अलवर), गीताजलि, शिवान्ग दवे, वदोडरा, प्रतिभा भार्द्वाज, हेमा श्रीवास्तव, कल्पना भदोउरिया, आयुशी कुमारी (बिहार)मेजू रजनी(महाराष्ट्र) इत्यादि देश भर की महिला रचनाकारो ने भाग लिया। कवि डा. सुरेश शौर्य ने(कब आजाद होती हैं स्त्रिया?) सुनाकर सबको संजीदा कर दिया।

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डब्लूडब्लूसी संस्था महिलाओं के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक क्षेत्र मे पुर्ण उन्नति के साथ-साथ साहित्य, कला, शिक्षा के क्षेत्रों में महिलाओं को आगे ले जाने हेतु तत्पर है। डब्लूडब्लूसी के संस्थापक कवि डा. सुरेश शौर्य ने देश भर की महिलाओं को इसके सफ़ल आयोजन हेतु आभार जताया है।

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