ख़ाकी तेरे सम्मान में

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कोराणा वायरस जैसी वैश्विक समस्या से जूझ रही इस विषम परिस्थिति में स्वास्थ्यकर्मी, पुलिसकर्मी एवं सफ़ाईकर्मी की भूमिका काफी सराहनीय है जितनी भी इन सबों के बहादुरी की प्रशंसा की जाय शून्य होंगी। अभी लॉकडाउन के वज़ह से घर से बाहर नही जा पा रहा हूँ, हर जगह के पुलिसकर्मी अपनी जान जोख़िम में डालकर हमारी आपकी रक्षा कर रही है किंतु हमारे बसनही थानाध्यक्ष आदरणीय “श्वेत कमल” जी जिस तरह कानून-व्यस्था को संभाले हुए हैं। यहाँ के साधारण जनमानस में संतोष पैदा हुआ है और अपराधियों के अंदर जो ख़ौफ़, इनके लिए थानाध्यक्ष एवं पूरी टीम बधाई के पात्र हैं,खास कर श्वेत कमल जी के व्यक्तित्व काफ़ी प्रभावशाली है, जिनके सम्मान में स्नेह राजहंस ने एक कविता अर्पित किया है

ख़ाकी तेरे सम्मान में…..

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ख़ाकी तेरे सम्मान में,
एक दीपक हमनें जलायें हैं..!

बेवज़ह मैंने भी पुलिस के डंडे खायी है
फ़िर भी औरों के दिल में वर्दी के लिए प्रीत जगायी है..!

बलिदान व शौर्य जैसी शब्दों से सजी तुम्हारी परिभाषा है
सच में ख़ाकी तुम्हारे रंग में मानवता की अटूट अभिलाषा है..!

दुनिया “कोराणा” जैसी वैश्विक महामारी से गुजर रही है
सिवाय संग तेरे, वर्ना लोग तो अब अपनों से भी बिछड़ रही हैं….!

होता हूं कभी जब फुरसत में,सोचता हूं क्या आप सो भी पाते हैं,
रात हो या दिन हर ज़रूरत में हर क़दम पे आपको साथ जो पाते हैं…!

हमें तो सिर्फ़ घर पे रहना है,कुछ नासमझ हायतौबा मचाये हैं
देख कर तुम्हारी तक़लीफ़ को,हमें तो कई बार आंखों में आंसू आये है…!

वैचारिक बंटवारों के आर में कुछ तो पत्थर भी बरसा रहे हैं
हिम्मत मत हारना मेरे शेर,मुझ जैसे सेकड़ो “स्नेह” पुष्प भी बरसा रहे हैं…!

ज़ाहिलों को हमनें रोते देखा है,क्या तुमनें वर्दी के हैसियत समझायें हैं
दिल से नमन करता हूं साहेब “श्वेत कमल”,अपने नाम को भी सार्थक बनाये हैं…!!

स्नेह~राजहंस (संतोष कुमार)
महुआ बाज़र, सहरसा

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