पृथ्वी

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पृथ्वी…!
तूने सबसे प्रेम से,
जिसका सृजन किया है।

तेरा…
उसी मानव ने,
सर्वाधिक दोहन किया है।

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कोरोना तो एक..
बहाना है, प्रकृति ने,
अपना शुद्धिकरण किया है।

उलट-पलट..
ले आती प्रलय, पर तूने,
ममता भरा आचरण किया है।

श्रीमती दिव्या त्रिवेदी, जो पूर्णियाँ से ताल्लुकात रखतीं हैं, ने उपर्युक्त शब्दों को पंक्तियों में पिरोकर “कोशी की आस” को प्रेषित किया है। आपको बताते चलें कि श्रीमती त्रिवेदी की कई रचनायें पूर्व में भी प्रकाशित हो चुकी है।

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