जाने:-“वर्षों बाद बन रहा है महाशिवरात्रि पर ऐसा शुभ संयोग”

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  • महाशिवरात्रि :-

“महाशिवरात्रि” पर्व हिन्दू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस पर्व को अर्धरात्रिव्यापिनी चतुर्दशी तिथि में मनाया जाना चाहिए। विभिन्न ज्योतिषाचायों के इस वर्ष सोमवार 4 मार्च को शाम लगभग 4 बजकर से चतुर्दशी प्रवेश हो रही है जो मंगलवार 5 मार्च को लगभग शाम 7 बजे तक रहेगी। अर्धरात्रिव्यापिनी ग्राह्य होने से यानी मध्यरात्रि और चतुर्दशी तिथि के योग में 4 मार्च को ही महाशिवरात्रि मनायी जाएगी।

  • क्यों है खास इस वर्ष का महाशिवरात्रि:-
  1. वर्षों बाद महाशिवरात्रि पर दुर्लभ संयोग बन रहा है, इस वर्ष सोमवार को महाशिवरात्रि है। सोमवार का स्वामी चन्द्रमा है। ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा को सोम कहा गया है और भगवान् शिव को सोमनाथ। अतः महाशिवरात्रि का सोमवार को होना बहुत ही शुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि सोमवार को भोले नाथ की पुजा से भगवान बोले नाथ प्रसन्न होते हैं और उसमें भी यदि सोमवार और महाशिवरात्रि का संयोग हो तो उसका क्या कहना।
  2. ज्योतिषाचायों के अनुसार महाशिवरात्रि पर सिद्धि एवं शुभ नाम के योग बन रहे हैं। वहीं तिथि और नक्षत्र को मिलाकर सर्वार्थसिद्धि योग भी बना रहे हैं।
  3. ज्योतिषाचायों के अनुसार महाशिवरात्रि पर सूर्य-चंद्रमा शिवयोग बना रहे है। शिवयोग सोमवार को लगभग 2 बजे से प्रारंभ हो रहा है। यह कल्याणकारी एवं सफलता प्रदान करने वाला योग माना जाता है। इस योग में भोले नाथ की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। ऐसी मान्यता है कि शिव योग में पूजन, जागरण और उपवास करने वाले मनुष्य का पुनर्जन्म नहीं होता। इस योग में आध्यात्मिक चिंतन और बौद्धिक कार्य करना भी शुभ माने जाते हैं। इन तीन शुभ योगों के कारण महाशिवरात्रि का पर्व और भी खास हो गया है। इन शुभ योगों में बाबा भोले नाथ की पूजा काफी फलदायक है। वहीं हर तरह की खरीददारी और शुभ काम इन योगों में किए जा सकते हैं।

 

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भगवान भोले नाथ की महिमा अपरम्पार है। भोले नाथ अपने भक्तों पर बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी हर इच्छा पूरी करते हैं। इसलिए भक्त जटाधारी की पुजा में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते हैं।

ऐसी मान्यता है कि जटाधारी को प्रसन्न करने के बाद मनुष्य को कभी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता है। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भक्तजन अलग-अलग तरीके से पूजा अर्चना करते हैं, जैसे कोई भांग-धतूरा चढ़ाता है, तो कोई गंगाजल, भक्त भोले नाथ का मंत्र भी लिखकर उन्हें खुश करने का प्रयास करते हैं।

 

 

Pic  Source-   अमरउजाला और एनडीटीवी.

 

A Singh

(यह लेखक के स्वतंत्र विचार हैं, इससे “कोसी की आस टीम” का सहमत होना आवश्यक नहीं है। )

 

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टीम- “कोसी की आस” ..©

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