आख़िर राज़ क्या है “वेलेंटाइन डे” (Valentine Day) का?

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भारत विविधताओं के साथ-साथ त्योहारों के देश के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यहाँ आए दिन कोई-न-कोई त्योहार मनाया जाता है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जाता है कि हम सिर्फ भारत में प्रारंभ हुये त्योहारों तक सीमित नहीं हैं बल्कि हम विभिन्न धर्मों को मानने वाले मिल-जुल कर सारे त्योहारों को खुशी-खुशी मनाते हैं जैसे होली, दिवाली, ईद, क्रिसमस इत्यादि। जितने भी त्यौहार मनाये जाते हैं उन सभी त्योहारों के पीछे कोई-न-कोई सच्ची कहानी या यूँ कहें तो कोई-न-कोई वजह होती है, जिसे हम इतिहास में भी पढ़ते हैं। ये सारे त्यौहार वर्षों से चली आ रही है और एक रिवाज या परंपरा की तरह बन गयी है, जिसे लोग अपने-अपने तरीके से मनाते हैं।

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ठीक उसी तरह “वेलेंटाइन डे” मनाने के पीछे भी कोई-न-कोई कहानी तो जरूर रही होगी? हर साल 14 फ़रवरी को हम “प्यार का दिन” या “वेलेंटाइन डे” के रूप में मनाते हैं। आइये जानते हैं कि आख़िर क्यों मनाई जाती है “वेलेंटाइन डे”?

जैसा कि अक्सर देखा जाता है कि अधिकांश त्योहार किसी-न-किसी व्यक्ति के नाम से जुड़ा होता है, ठीक उसी तरह “वेलेंटाइन डे” भी वेलेंटाइन नामक व्यक्ति से जुड़ा है। आप सोच रहें होंगे कि वेलेंटाइन कोई आशिक रहा होगा लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। इस “प्यार भरे दिन” के कहानी की शुरुआत प्यार से भरा नहीं है बल्कि यह वेलेंटाइन नामक व्यक्ति के मौत से जुड़ी कहानी है।

यह एक अत्याचारी राजा और एक संत के बीच की कहानी है। “ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉराजिन” नाम की पुस्तक के मुताबिक रोम में एक पादरी थे “संत वैलेंटाइन” वो दुनिया में प्यार को बढ़ावा देने में विश्वास रखते थे, उनके लिए प्रेम ही जीवन था, दूसरी तरफ एक अत्याचारी राजा “क्लॉडियस” था। राजा का मानना था कि एक अविवाहित सिपाही, एक शादी-शुदा सिपाही के मुकाबले जंग के लिए ज्यादा उचित और प्रभावशाली सिपाही होता है क्योंकि शादी-शुदा सिपाही को हर वक़्त बस इसी बात की चिंता लगी रहती है कि उसके मर जाने के बाद उसके परिवार का क्या होगा? और इस चिंता से वो जंग में अपना पूरा ध्यान नहीं लगा पाता। यही सोच राजा ने ऐलान किया कि उसके राज्य का कोई भी सिपाही शादी नहीं करेगा और जिस किसी ने भी उसके इस आदेश का उल्लंघन किया तो उसे कड़ी-से-कड़ी सजा दी जाएगी।

 

लेकिन “संत वैलेंटाइन” ने राजा “क्लॉडियस” के इस आदेश का विरोध किया और रोम के लोगों को प्यार और विवाह के लिए प्रेरित किया। इतना ही नहीं, उन्होंने कई सैन्य अधिकारियों और सैनिकों की शादियाँ भी करवाई। यह जानकर राजा काफी नाराज़ हुये और “संत वैलेंटाइन” को 14 फरवरी 269 में फांसी पर चढ़वा दिया। इसलिए हर साल इस दिन को “प्यार का दिन” या “वेलेंटाइन डे” और समूचे सप्ताह को “वेलेंटाइन वीक” के रूप में मनाया जाता है।

“संत वैलेंटाइन” के इस बलिदान के वजह से 14 फ़रवरी का नाम उनके नाम पर रखा गया और इस दिन दुनिया भर में सभी प्यार करने वाले लोग “संत वैलेंटाइन” को याद करते हैं और एक दुसरे के साथ प्यार बाँटते हैं। इस दिन सभी अपने प्रेमी-प्रेमिका को फुल, तोहफे और चॉकलेट दे कर अपने प्यार का इजहार करते हैं। समय के साथ “वेलेंटाइन डे” प्रेम, स्नेह, करुना और मोहब्बत का दिन बन गया है।

Pic-source – (https://www.google.com/search?q=image+of+valentine+day&rlz=1C1ASRM_enIN623IN624&oq=image+of+&aqs=chrome.4.69i57j69i59l3j0l2.11367j0j8&sourceid=chrome&ie=UTF-8)

 

 

 

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PIC SOURCE-GOOGLE IMAGES

 

टीम- “कोसी की आस” ..©

 

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